Tuesday, 14 May 2013

मरने के बाद नई तकनीक से 7 लोग हुए जिंदा


मेलबर्न।। ऑस्ट्रेलिया में एक करिश्मा हुआ है और इसे अंजाम दिया है एक खास तकनीक ने। यहां 30 साल के एक शख्स को क्लिनिकली डेड होने के 40 मिनट बाद वापस जिंदा कर दिया गया। इसका श्रेय जाता है देश की पहली मृत को जिंदा करने वाली तकनीक को। अभी इन तकनीकों का ट्रायल चल रहा है।

कॉलिन फीडलर विक्टोरिया से हैं। वह दिल की बीमारी से पीड़ित थे। अल्फेड अस्पताल में वह 40 से 60 मिनट तक मृत पड़े रहे, पर नई तकनीक ने उन्हें जिंदा कर दिया। वह अकेले नहीं हैं। दो और लोगों को भी दिल का दौरा पड़ा था और उन पर भी इस तकनीक का जादू चल गया।

अस्पताल में दो नई मशीनों - मकैनिकल सीपीआर मशीन और पोर्टेबल हार्ट-लंग मशीन का ट्रायल चल रहा है। सीपीआर जहां लगातार छाती को दबाने का काम करती है वहीं हार्ट-लंग मशीन पेशंट के जरूरी अंगों जैसे कि ब्रेन आदि तक ऑक्सिजन और ब्लड का फ्लो बनाए रखती है।

हेराल्ड सन के मुताबिक, पिछले साल फीडलर को हार्ट अटैक आया था और उन्हें 40 मिनट तक क्लिनिकली डेड बताया गया। पर अब एक साल बाद उनका कहना है, मैं इतना भाग्यशाली हूं कि मैं बयां तक नहीं कर सकता।

अब तक ऑटो पल्स मशीन और एक्स्ट्रा-कॉरपोरियल मेंब्रेन ऑक्सिजिनेशन तकनीक से सात कार्डिएक पेशंट्स का इलाज किया जा चुका है। यह तकनीक डॉक्टर को दिल का दौरा पड़ने की वजह को समझने का मौका देती है। इससे डॉक्टर उस परेशानी का सही से इलाज कर पाता है। इस दौरान मशीन खून और ऑक्सिजन सप्लाई बराबर करवाती रहती है। इससे स्थायी विकलांगता का खतरा जाता रहता है।

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