Friday, 26 April 2013

क्या गुल खिलाएगी बाबा रामदेव-मोदी की जोड़ी


देवभूमि में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की आमद की आहट ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मोदी की यह यात्रा यूं तो गैरराजनीतिक है, लेकिन इसके राजनीतिक मायने भी निकलकर सामने आ रहे हैं। खासकर, राजनीतिक दल बनाने की घोषणा कर चुके बाबा के मोदी प्रेम से भाजपाई जरूर राहत महसूस कर रहे होंगे। मोदी के माध्यम से ही सही, एक ऐसे राजनीतिक दल का गठन रुक सकेगा, जो भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगा सकता है।

कांग्रेस के साथ छत्तीस का आंकड़ा बनने से पहले, यानी मई-जून 2011 तक बाबा रामदेव की पतंजलि योगपीठ में भाजपा ही नहीं, सभी सियासी पार्टियों के बड़े नेताओं का आना-जाना निहायत सामान्य सी बात हुआ करती थी, लेकिन काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबा की मुहिम के बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई। पिछले दो सालों में संभवतया राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले राजनेताओं में मोदी ही ऐसे अकेले राजनेता हैं, जिनका कार्यक्रम बाबा की योगपीठ में बना है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो 2014 के लोकसभा आम चुनाव इसका मुख्य कारण हैं।

मोदी की राष्ट्रीय राजनीति में दस्तक के बाद भाजपा के अंदरूनी समीकरण चाहे जैसी भी शक्ल लें, लेकिन इतना तो तय है कि मोदी लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए अहम रोल में रहेंगे। मोदी इस भूमिका के लिए सुविचारित रणनीति के तहत अपने कदम बढ़ा रहे हैं। समाज के अलग-अलग तबकों के बीच जिस तरह उन्होंने अपनी बात अब तक रखी है, उससे इसकी पुष्टि भी होती है। बाबा रामदेव के कार्यक्रम में संत समाज से रूबरू होने के लिए मोदी के हरिद्वार आने को भी इसी रणनीति का एक हिस्सा माना जा रहा है। वैसे भी भाजपा में अग्रिम पंक्ति में अपनी भूमिका सुनिश्चित करने के लिए मोदी के लिए यह जरूरी है कि संत समाज का आशीर्वाद भी उनके पास हो।

मोदी की बाबा से जुगलबंदी के बाद अब इस बात की संभावना काफी कम मानी जा रही है कि बाबा रामदेव आगामी लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दल का गठन करें। दरअसल, बाबा अक्सर राजनीतिक दल बनाने की बात तो करते हैं, मगर साथ ही भाजपा में नरेंद्र मोदी की पैरवी भी खुलकर करते रहे हैं। इससे समझा जा रहा है कि अगर मोदी को पार्टी प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में पेश करने को तैयार हो जाती है तो शायद बाबा फिलहाल अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को विराम दे दें। मोदी की हरिद्वार यात्रा इस लिहाज से भी खासी अहम साबित हो सकती है।

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