Friday, 7 June 2013

भारतीय स्टूडेंट्स ने डिवेलप किया स्पेशल आई माउस

मैंगलोर।। मैंगलोर के 4 इंजिनियरिंग स्टूडेंट्स ने ऐसा नायाब आविष्कार किया है, जिससे विकलांगों को कंप्यूटर ऑपरेट करने में बहुत सुविधा होगी। इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड कम्यूनिकेश इंजिनियरिंग के 4 स्टूडेंट्स ने स्पेशल आई माउस डिवेलप किया है। यह आई माउस उन लोगों के लिए इनपुट डिवाइस का काम करेगा, जो अपने हाथों का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

मैंगलोर के श्रीनिवास इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (SIT) में पढ़ने वाली श्रुति शेट्टिगर, प्रसाद नायक, वनीश्री और संध्या शेत ने असोसिएट प्रफेसर सतीश कुमार के. और इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड कम्यूनिकेशन इंजिनियरिंग के एचओडी भीमा शास्त्री की गाइडेंस में काम करते हुए यह स्पेशल डिवाइस तैयार किया है। प्रफेसर सतीश ने बताया कि स्टूडेंट्स ने एक ऐप्लिकेशन डिवेलप करके इसे वेबकैम वाले कंप्यूटर में इन्स्टॉल कर दिया। कंप्यूटर से एक लाइट डिपेंडेंट रेज़िस्टर सर्किट जोड़ा गया, जिसे एक कुर्सी से फिट कर दिया है। जैसे ही कोई विकलांग शख्स इस कुर्सी पर बैठता है, कंप्यूटर ऑटोमैटिकली ऑन हो जाता है। कंप्यूटर के साथ जुड़ा वेबकैम कुर्सी पर बैठे शख्स की आंखों की मूवमेंट कैप्चर करना शुरू कर देता है।

प्रफेसर ने बताया कि स्टूडेंट्स द्वारा डिवेलप किया गया ऐप वेबकैम के जरिए मिल रही यूजर की आई बॉल्स की मूवमेंट्स को स्टडी करके कंप्यूटर को कमांड्स देना शुरू कर देता है। इसके बाद फिजिकली चैलेंज्ड व्यक्ति बिना माउस के कंप्यूटर को यूज कर सकता है। उसे बस इतना करना होगा कि किसी फोल्डर या आइकन को ओपन करने के लिए उसे फोकस करके घूरना होगा। कुछ ही सेकंड्स में फोल्डर या आइकन ओपन हो जाएगा। आई बॉल की मूवमेंट्स से कर्सर को भी मूव किया जा सकता है।

खास बात यह है कि यह खास इनोवेशन करने में स्टूडेंट्स ने सिर्फ 5,000 रुपये खर्च किए हैं। अब ये स्टूडेंट इस ऐप का पेटेंट कराना चाहते हैं। प्रफेसर सतीश का कहना है कि पेटेंट हासिल होने के बाद में मार्केट में इस प्रॉडक्ट को लॉन्च किया जाएगा, ताकि यह विकलांग लोगों के काम आ सके।

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