Thursday, 30 May 2013
मंगल पर मिला चूहा!
Monday, 20 May 2013
मनमोहन ने ली से की वार्ता, घुसपैठ पर भारत ने जतायी चिंता
Thursday, 9 May 2013
पाकिस्तानी कैदी सनाउल्लाह रंजय की चंडीगढ़ के अस्पताल में मौत
चंडीगढ़ : जम्मू की एक जेल में गत सप्ताह हमले में घायल हुए पाकिस्तानी कैदी सनाउल्लाह रंजय की चंडीगढ़ के अस्पताल में गुरुवार सुबह मौत हो गई। यह जानकारी चिकित्सकों ने दी।
Tuesday, 7 May 2013
अब मोबाइल से हैलो करना 30 फीसद तक महंगा
Monday, 29 April 2013
सरबजीत को इलाज के लिए विदेश नहीं भेजेगा पाक, भारत ने अपने ही नेताओं को लगाई लताड़
सरबजीत के परिवार वालों की मांग है कि उन्हें इलाज के लिए भारत भेजा जाए। लेकिन इसकी संभावना नहीं लगती, क्योंकि पाकिस्तान सरकार ने सरबजीत के स्वास्थ्य पर नजर रखने के लिए चार डॉक्टरों का जो पैनल बनाया था उसने इसके खिलाफ सिफारिश की है। पैनल ने कहा है कि सरबजीत इलाज के लिए विदेश भेजने की जरूरत नहीं है। भाजपा और सपा ने सरबजीत को भारत लाकर बेहतर इलाज मुहैया कराने की मांग की है जबकि केंद्र सरकार में मंत्री राजीव शुक्ल का कहना है कि इस मसले को बेवजह तूल दिया जा रहा है।
पाकिस्तान पहुंची सरबजीत की बहन, पत्नी और बेटियों ने कड़ी सुरक्षा के बीच अस्पताल जाकर आईसीयू की खिड़की से सरबजीत को देखा। इस दौरान बेटियां भावुक हो गईं। परिवार के किसी को भी सदस्य को सरबजीत के नजदीक नहीं जाने दिया गया। डॉक्टरों का कहना है कि इससे सरबजीत और परिवार को दिक्कत हो सकती है।
जिन्ना अस्पताल को सब-जेल में तबदील कर दिया गया है। आईसीयू के आसपास किसी को जाने नहीं दिया जा रहा। अस्पताल में जगह-जगह हथियारबंद पुलिसबल तैनात किया गया है।
Friday, 29 March 2013
ट्रेन में अब बच्चों का पूरा टिकट लगेगा
ब्राजीलियन लेडी डॉक्टर ने की 300 मरीजों की हत्या
Tuesday, 19 March 2013
डीएमके ने राष्ट्रपति को सौंपी समर्थन वापसी की चिट्ठी
Monday, 18 March 2013
उत्तर प्रदेश्ा में हर साल होंगी 41 हजार भर्तियां
Sunday, 17 March 2013
मुसलमानों का हित पहले, सरकार बाद में: मुलायम
Tuesday, 11 September 2012
'राहुल गांधी पर रेप के आरोप के पीछे अखिलेश'
Tuesday, 7 August 2012
संसद की कार्यवाही में आज हिस्सा लेंगे सचिन और रेखा
Sunday, 1 July 2012
विधायक के साथ दुर्व्यवहार मामले में पांच गिरफ्तार
Sunday, 24 June 2012
प्रसाद में मादक पदार्थ
Saturday, 21 April 2012
भाजपा की जीत या कांग्रेस की हार : अजय पाण्डेय
Friday, 6 April 2012
यूपी में पूरे घर के बदल डालेंगे राहुल
समीक्षा बैठक के दौरान राहुल ने अपने तेवरों से पार्टी नेताओं को साफ कर दिया है कि अब वह न सिर्फ हार की जिम्मेदारियां तय करने की ठान चुके हैं, बल्कि बड़े बलिदान लेने के मूड में भी हैं। उन्होंने इशारों में यहां तक कहा कि जिन नेताओं का जनाधार नहीं हैं, उन्हें जाना ही होगा। यूपी से पार्टी विधायक नवाब काजिम अली खान का कहना था कि राहुल ने साफ कहा है कि पार्टी के जिन लोगों ने सहयोग नहीं किया, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एक महीने के भीतर असर दिखने लगेगा।
दो दिन तक चली समीक्षा बैठक में कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह से लेकर केंद्रीय मंत्रियों की बयानबाजी, आपसी कलह और इन सबसे ऊपर लचर संगठन के असहयोग का मुद्दा ही तारी रहा। गुरुवार को 150 से ज्यादा हारे प्रत्याशियों और शुक्रवार को 28 विधायकों और पूर्व सांसदों से बातचीत के बाद आखिर में राहुल ने यूपी कोटे के मंत्रियों और सांसदों से चर्चा की। एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जब उन्होंने पार्टी संगठन की कमियों की ओर ध्यान दिलाया, तो राहुल ने कहा, 'अभी तक 'हाथ' की कोमलता देखी है। अगले 15 दिनों में इसकी सख्ती का अहसास भी सबको हो जाएगा।'
सब सुनने के बाद राहुल ने कहा कि अगर कोई मंत्री सोचता है कि वह गलती करते रहें और कोई कार्रवाई नहीं होगी तो ऐसा नहीं है। बाहरियों को टिकट का मुद्दा भी उठा, जिस पर राहुल का कहना था, कहां गलती हुई, वह समझते हैं। मगर बाहर से आए लोगों को वोट भी मिले हैं। अब संगठन और केंद्रीय मंत्रियों पर कार्रवाई पर हामी भरवाने के बाद राहुल के अगले कदम पर सबकी निगाहें लगी हुई हैं।
जिस ट्रैक्टर ने नरेंद्र को कुचला, उसी से पुलिस वसूल रही थी रेत!
भोपाल। जिस बानमौर पुलिस थाने पर आईपीएस अफसर नरेंद्र कुमार बैठे थे, उसकी बाउंड्रीवॉल के लिए रेत और पत्थर उन्हीं ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से वसूला जा रहा था, जिन्होंने नरेंद्र कुमार को कुचल डाला। यह वसूली भी थाना प्रभारी सीबीएस रघुवंशी करते थे, जिनके नरेंद्र कुमार के साथ संबंधों की पड़ताल सीबीआई जांच का मुख्य बिंदु है।
डीबी स्टार टीम ने मामले से जुड़ी कई घटनाओं की पैरेलल इन्वेस्टीगेशन की तो निकला कि आईपीएस नरेंद्र कुमार को अपने ही अधीनस्थों का पर्याप्त सहयोग नहीं मिला। सीबीआई की टीम ने गत 15 व 16 मार्च को टीआई रघुवंशी तथा थाने के अन्य स्टाफ से अकेले में घंटों बातचीत की। हालांकि सीबीआई की टीम ने मीडिया से बात नहीं की, लेकिन थाने में मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों ने नाम न छापने के अनुरोध पर बताया कि सीबीआई की टीम जांच में लगातार यह जानने की कोशिश कर रही है कि एसडीओपी और थाना प्रभारी के संबंध किस तरह के थे?
नरेंद्र कुमार के साथ जो भी हुआ उसकी जांच सीबीआई कर रही है। लेकिन लोग जो कह रहे हैं, उससे प्रदेश में पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठ रहे हैं?
वायरलैस मैसेज पर भी...
मनोज ट्रैक्टर को भगाते हुए थाने से 700 मीटर दूर राजे पेट्रोल पंप तक ले जाता है। पीछे पुलिस की गाड़ी को आता देख, मनोज ट्रैक्टर को बीच सड़क से काटता है तथा डिवाइडर के ऊपर से निकालते हुए दूसरी रोड पर यू टर्न ले लेता है। मनोज ट्रैक्टर भगाता है और कुछ कदम की दूरी पर स्थित राजे वेयर हाउस की तरफ कच्ची रोड पर मोड़ लेता है।
नरेंद्र कुमार टैक्टर को मुख्य सड़क पर ही रोकने की कोशिश करते हैं, लेकिन वह नहीं रुकता। फिर वे 40 फीट दूर तक दौड़ लगाते हुए ट्रॉली पर चढ़ जाते हैं। इसके बाद ट्रॉली का एक पहिया गड्ढे में फंस जाता है और इसी जद्दोजहद के बीच ये घटना हो जाती है। इस दौरान एसडीओपी के साथ सिर्फ दो आरक्षक राजकुमार और किशन ही रहते हैं, जो उनकी मदद को आगे आने के बजाय दूर खड़े रहते हैं। इतना ही नहीं बार-बार सूचना देने के बाद भी थाना प्रभारी नहीं आते हैं।
थाने पर रुकती थीं ट्रॉलियां फिर मनोज ने क्यों नहीं रोकी
वहीं बानमौर के कुछ स्थानीय लोगों का भी कहना है कि बानमौर थाने के सामने से गुजरने वाली रेत व पत्थर की ट्रॉलियां थाने पर रुकती थीं। इन ट्रॉलियों पर लदे सामान में से कुछ पुलिसकर्मी उतरवा लेते थे। इसकी वजह थी थाने की २क्क् मीटर की बाउंड्रीवॉल का निर्माण। इसके लिए शासन ने बाकायदा १.99 लाख रुपए मंजूर किए थे, लेकिन नगद सामान मंगवाने के बजाय थाने वाले सामने से गुजरने वाली ट्रॉलियों को रोक कर उनसे ही पत्थर व रेत उतरवा लेते थे। यह बात नरेंद्र कुमार को नापसंद थी।
इत्तेफाक से घटना वाले दिन भी जब थाने के सामने से ट्रैक्टर गुजरा, तो एसडीओपी नरेंद्र कुमार ने उसे रुकने का इशारा किया। लेकिन चालक मनोज ने ट्रैक्टर रोकने के बजाय और तेज चलाकर भागने की कोशिश की। इस पर नरेंद्र कुमार को कुछ संदेह हुआ तो उन्होंने उसका पीछा किया। इसके बाद काफी देर तक चोर-सिपाही का खेल चलता रहा, लेकिन बानमौर थाने की पुलिस ने उनकी मदद करना तो दूर, उनके आदेशों तक को अनसुना कर दिया। लोगों का कहना है कि अगर उस दिन स्थानीय पुलिस समय रहते अलर्ट हो जाती तो शायद नरेंद्र कुमार की जान बच सकती थी?
ऐसे हुआ बानमौर टीआई रघुवंशी का पर्दाफाश
डीबी स्टार टीम की पड़ताल में पता चला कि इस हादसे से थोड़ी देर पहले ही ‘भगीता का पुरा’ में एक समुदाय विशेष के लोगों के बीच झगड़ा हुआ था। इसकी सूचना देने पीड़ित थाने पहुंचे तो थाना प्रभारी रघुवंशी नहीं मिले। तब पीड़ितों ने फोन पर नरेंद्र कुमार को सूचना दी। उन्होंने टीआई को मौके पर पहुंचने के आदेश दिए तथा खुद भी पहुंच गए। लेकिन रघुवंशी नहीं पहुंचे। इसके बाद थाने पर लौटने के कुछ देर बाद ही थाना प्रभारी फिर गायब हो गए, जबकि एसडीओपी थाने पर ही मौजूद रहे।
एसडीओपी का आदेश नहीं माना
कुछ देर बाद थाने के सामने से पत्थरों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली क्रमांक एमपी 06 जे.ए. 3112 गुजरती है, जिसे नरेंद्र कुमार रुकने का इशारा करते हैं। चालक मनोज गुर्जर ट्रैक्टर को नहीं रोकता है तथा स्पीड बढ़ाकर आगे निकल जाता है। इसके बाद नरेंद्र कुमार अपने दो आरक्षकों राजकुमार व किशन को लेकर ट्रैक्टर का पीछा करते हैं तथा वायरलैस पर थाना प्रभारी को भी फोर्स के साथ आने को कहते हैं।
थाना प्रभारी व एसडीओपी के संबंध थे तनावपूर्ण
सीबीएस रघुवंशी तथा नरेंद्र कुमार के संबंध तनावपूर्ण थे। इसकी वजह एसडीओपी की ईमानदारी थी। उन्होंने आते ही पत्थर व रेत का अवैध कारोबार बंद करा दिया था। इन धंधों से बानमौर थाने को डेढ़ लाख रु. प्रतिमाह मिलते थे। थाने की बाउंड्रीवॉल के निर्माण में जो भी पत्थर लगा है, वह खरीदा नहीं गया बल्कि ट्रॉलियों को जबरिया रुकवाकर उतरवाए जाते थे।
- भारत सिंह गुर्जर, उपाध्यक्ष, नगर पंचायत, बानमौर
अनुत्तरित हैं ये सवाल
क्या तेजतर्रार युवा आईपीएस अफसर नरेंद्र कुमार ने बानमौर एसडीओपी बनते ही खनिज माफियाओं पर नकेल डाल दी थी? क्या इस वजह से थाने को हर माह होने वाली डेढ़ लाख रुपए की कमाई बंद हो गई थी? क्या इस बात को लेकर एसडीओपी और थाना प्रभारी के संबंध सामान्य नहीं थे? क्या इस टकराव के चलते ही एसडीओपी के बुलाने पर भी थाना प्रभारी तत्काल मौके पर नहीं पहुंचे?
हत्या या हादसा यही है जांच का मुख्य विषय
जांच चाहे मप्र पुलिस करे या फिर सीबीआई, सबसे पहले तो जांच का मुख्य बिंदु उन आरोपों की सच्चाई पता लगाना है, जिसमें कहा जा रहा है कि नरेंद्र कुमार की हत्या की गई है। साथ ही यह पता लगाना होगा कि ट्रैक्टर चालक का उद्देश्य क्या था? ट्रैक्टर-ट्रॉली पर चढ़ने के वक्त नरेंद्र और चालक मनोज गुर्जर के बीच क्या हाथापाई हुई थी? ये सभी बातें जांच का विषय होना चाहिए।
-श्याम स्वरूप शुक्ला, रिटायर एडीजी, मप्र पुलिस
नरेंद्र कुमार के साथ मेरे मधुर संबंध थे
नरेंद्र कुमार से मेरे संबंध मधुर थे। ज्वाइनिंग के वक्त वे मेरे घर 15 दिन रुके थे। घटना के दिन उनके साथ बैठे पुलिसवालों ने थाने पर कॉल किया था। कॉल आते ही बैकअप भेजा गया, लेकिन तब तक घटना हो चुकी थी। उस वकत मैं थाने से दूर दूसरे प्वाइंट की सर्चिग पर था। बाउंड्रीवॉल का निर्माण भी बाकायदा रॉयल्टी की रसीदें कटवाकर लिए गए पत्थर से ही किया गया है।
-सी.बी.एस रघुवंशी, तत्कालीन टीआई, बानमौर थाना
Saturday, 25 February 2012
दो मंत्रियों पर भारी पड़ सकता है सोमवार
नई दिल्ली। कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के बाद अब केंद्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल भी आचार संहिता उल्लंघन के घेरे में हैं। राष्ट्रपति शासन लगने संबंधी बयान पर एतराज जताते हुए चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस जारी कर सोमवार की दोपहर तक सफाई देने को कहा है। बेनी की सुनवाई भी उसी शाम दोनों पक्षों की मौजूदगी में होगी। इसलिये सोमवार दो मंत्रियों पर भारी पड़ सकता है।उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार न बनने की दशा में राष्ट्रपति शासन लगने का बयान देना जायसवाल के लिए मुश्किलों का सबब बन गया। एक तरफ जहां कांग्रेस नेतृत्व को यह बयान रास नहीं आ रहा है, वहीं आयोग ने भी नोटिस जारी कर दिया है। शुक्रवार को जारी नोटिस में आयोग ने माना है कि पहली नजर में उनका बयान आचार संहिता का उल्लंघन है जिसमें मतदाताओं को परोक्ष धमकी दी गई है।
उन्हें सोमवार की दोपहर दो बजे तक अपनी सफाई देने को कहा गया है। उधर, बेनी का मामला भी सोमवार तक टल गया है। शिकायतकर्ता और भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन के आग्रह पर सुनवाई सोमवार की शाम को होगी। ध्यान रहे कि उत्तार प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मुस्लिम आरक्षण बढ़ाने के बयान पर घिरे बेनी के आचरण पर आयोग ने पहले ही अपनी सख्त आपत्तिजता दी थी। बेनी ने आग्रह किया था कि कोई फैसला लेने से पहले उन्हें सुनवाई का एक मौका दें। सुनवाई के दौरान शाहनवाज को भी मौजूद रहना था। लेकिन बाद में उनके आग्रह पर सुनवाई की तिथि सोमवार तक बढ़ा दी गई है।
गौरतलब है कि सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष के अधिवक्ता भी मौजूद होते हैं। उनकी दलील सुनने के बाद आयोग अपना निर्णय लेता है। वैसे यह तय माना जा रहा है कि बेनी को कम से कम आचार संहिता उल्लंघन का दोषी करार दिया जाएगा। जबकि, भाजपा की ओर से कुछ कठोर निर्णय लेने के लिए दबाव बनाया जाएगा। गौरतलब है कि कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के मामले में आयोग ने राष्ट्रपति को भी पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की थी। राष्ट्रपति ने कार्रवाई के लिए उस पत्र को प्रधानमंत्री को भेज दिया था।
तेल की कीमतों के लिए भारत-चीन दोषी
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का ठीकरा एक बार फिर भारत और चीन के सिर पर फोड़ा है। ओबामा ने कहा कि भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों में तेल की मांग लगातार बढ़ रही है और इसके चलते अमेरिकियों को तेल के लिए ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं।ओबामा ने कहा कि 2010 में चीन में एक करोड़ नई कारें सड़कों पर आईं आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इन कारों के लिए कितने तेल की जरुरत होगी। भारत और चीन जैसे देशों में कारों की मांग लगातार बढ़ रही है वह अमेरिकियों की तरह नई कारें खरीदना चाहते हैं। गौरतलब है कि अमेरिका दुनिया का सबसे ज्यादा तेल खपत करने वाला देश है सबसे ज्यादा कारें भी अमेरिका में है। इसके बावजूद ओबामा तेल को लेकर भारत और चीन पर निशाना साधते रहते हैं।













