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Wednesday, 12 June 2013

देश की रक्षा करेंगे रोबोट

नई दिल्ली। चीन और पाकिस्तान सावधान हो जाएं। भारत की रोबोट सेना अब सरहदों की हिफाजत के लिए तैयार हो रही है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) रोबोट आर्मी विकसित करने के काम में तेजी से जुटा हुआ है। बकौल डीआरडीओ प्रमुख अविनाश चंदर, बहुत जल्द रोबोट सैनिक देश की रक्षा करते नजर आ सकते हैं। भविष्य की जंग में इनकी अहम भूमिका होगी। उनका कहना है कि भविष्य की जंगी जरूरतों के मद्देनजर मशीनी लड़ाकों को तैयार करना हमारी प्राथमिकता में शामिल है। डीआरडीओ के इस कार्यक्रम से भारत भी उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जो रोबोट सेना तैयार कर रहे हैं।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए डीआरडीओ प्रमुख ने यह जानकारी दी। अविनाश चंदर ने बताया, हम उच्च बौद्धिक क्षमता वाले ऐसे रोबोट सैनिक तैयार कर रहे हैं जो दोस्त और दुश्मन के बीच फर्क करने में सक्षम होंगे। ये सरहदों पर भी तैनात होंगे।

उन्होंने कहा कि शुरू में तो रोबोट सैनिकों को दोस्त-दुश्मन का अंतर बताना पड़ेगा, लेकिन बाद में इन्हें इस कदर सक्षम बना दिया जाएगा ताकि युद्ध के मैदान में ये अग्रणी मोर्चे संभाले और पीछे हमारे सैनिक इनकी मदद के लिए तैनात रहें। अविनाश चंदर के अनुसार भविष्य में मानवरहित लड़ाइयां होंगी और जिसकी तकनीक जितनी उन्नत होगी, वही जंग में विजयी होगा।

डीआरडीओ प्रमुख का कहना है कि अब भी रोबोट का इस्तेमाल बम निष्क्रिय करने और विकिरण प्रभावित क्षेत्रों में अभियान के चलाने के लिए होता है।

Monday, 6 May 2013

टल गया टकराव, लौटी चीनी सेना, आज होगी अधिकारिक घोषणा


नई दिल्ली। आखिरकार करीब तीन हफ्ते के तनाव का सुखद अंत हो गया। चीन ने रविवार देर शाम लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी सेक्टर से अपने सैनिक हटा लिए। इसकी अधिकारिक घोषणा दोनों देश आज करेंगे। इस तनाव के दूर होने के साथ ही 9 मई को भारत के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की चीन यात्रा का रास्ता साफ हो गया है।

तीन हफ्ते पहले लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी [डीबीओ] सेक्टर में घुस आई चीन की सेना को लेकर जारी तनाव समाप्त हो गया है। दोनों देशों के बीच घंटों चली उच्च स्तरीय वार्ता के बाद रविवार की शाम इस बात पर सहमति बनी कि दोनों देशों की सेनाएं उस क्षेत्र में आमने-सामने गाड़े गए तंबुओं को हटा लेंगी और एक साथ पीछे हटेंगी। इसके बाद शाम साढ़े सात बजे दोनों देशों की सेनाओं के स्थानीय कमांडरों ने सैनिकों के साथ पीछे हटने से पहले एक दूसरे से हाथ भी मिलाए।

चीन की सेना गत 15 अप्रैल को भारत की वास्तविक नियंत्रण रेखा [एलएसी] के 19 किलोमीटर अंदर तक घुस आई थी और पांच तंबू गाड़ दी थी। वहां करीब 50 सैनिकों के अलावा सेना के वाहन और कुत्ते भी थे। उल्लेखनीय है कि चीन इस घुसपैठ के बाद भारतीय सेना ने भी चीन के तंबुओं से करीब 300 मीटर दूर उसके सामने अपने तंबू गाड़ दिए थे। समझौता में तय यह हुआ कि दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटेंगी। इससे पहलें दोनों देशों की सेनाओं के बीच शनिवार को चौथी फ्लैग मीटिंग भी नाकाम हो गई थी। चुशूल में शनिवार को हुई उस बैठक का नेतृत्व ब्रिगेडियर स्तर के अधिकारियों ने किया था। वह बैठक करीब 45 मिनट तक चली थी लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला था। केवल इस बात पर सहमति बनी थी बातचीत जारी रखी जाएगी।

इसके साथ इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए उच्च स्तर पर कूटनीतिक प्रयास भी जारी रहे। अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि क्या चीन की सेना पूरी तरह से वास्तविक नियंत्रण रेखा के पीछे चली जाएगी और 15 अप्रैल के पहले वाली स्थिति बहाल हो जाएगी या नहीं।