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Thursday, 18 July 2013

मिड-डे मील में जहर विपक्ष की साजिश हो सकती है: शिक्षा मंत्री

पटना।। बिहार सरकार ने बच्चों की मौत मामले को विपक्षी दलों की साजिश करार दिया है। राज्य के शिक्षा मंत्री पी. के. शाही ने बुधवार को कहा कि शुरुआती जांच के दौरान यह स्पष्ट है कि मिड-डे मिल में जहर मिला हुआ था और यह फूड पॉइजनिंग का मामला नहीं है। विपक्षी पार्टी आरजेडी का नाम लिए बिना शाही ने कहा कि गांववालों ने बताया कि एक पार्टी विशेष के सक्रिय कार्यकर्ता अर्जुन राय के किराना दुकान से स्कूल में सामग्री की सप्लाई की जाती है। अर्जुन राय उस स्कूल की प्रभारी हेड मिस्ट्रेस मीना देवी के पति हैं। इसके अलावा राय मशरख में पार्टी विशेष के प्रभावशाली माने जाने वाले ध्रुव राय के चचेरे भाई हैं और वह एक बडे़ राजनेता के करीबी हैं। 

शाही ने बताया कि मीना देवी 2011 में इस स्कूल में प्रतिनियुक्त होने से पहले बहुआरा मिडल स्कूल में कार्यरत थीं और उनकी प्रतिनियुक्ति मशरख प्रखंड के तत्कालीन शिक्षा पदाधिकारी प्रबोध कुमार ने की थी। शाही ने कहा कि ऐसी अपुष्ट सूचना है कि उनकी प्रतिनियुक्ति किसी राजनीतिक दबाव के अंतर्गत की गई थी। शाही ने आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव से यह पूछा है कि वह बताएं कि अर्जुन और ध्रुव राय कौन हैं। इस बीच छपरा में मिड-डे मील खाने से 27 बच्चों की मौत के बाद हंगामा थमा भी नहीं है कि गया और मधुबनी में भी मिड डे मील मासूमों पर कहर बनकर टूटा। गया में बुधवार को मिड डे मील खाने से एक बच्चे की मौत हो गई और 22 बीमार हैं। दूसरी तरफ मधुबनी में भी मिड डे मील खाने से 50 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई है। इनमें से सात बच्चों को तत्काल हॉस्पिटल में भर्ती काराया गया है। 

उधर, महाराष्ट्र के एक स्कूल में भी 31 बच्चों के मिड-डे मील खाने के बाद बीमार पड़ने की खबर है। मधुबनी से 22 किलोमीटर दूर बिस्फी के नवटोलिया मिडल स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 50 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। बताया जा रहा है कि बच्चों को दिए जाने वाले खाने में छिपकली गिर गई थी, लेकिन इसके बावजूद स्कूली छात्रों को खाना परोसा गया। मिड-डे मील खाने के बाद स्कूल के बच्चों को पेट दर्द और उल्टी होने लगी। इसके बाद डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची। फिलहाल सभी बच्चों को हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। सात बच्चों के अलावा सभी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उधर, महाराष्ट्र के धुले में एक म्यूनिसिपल स्कूल के कई बच्चे मिड-डे मील खाने का बाद बीमार हो गए हैं। 30 से अधिक बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गौरतलब है कि मंगलवार को बिहार के छपरा जिले में मिड-डे मील खाने से 27 बच्चों की मौत हो गई।

 इसके साथ ही 28 बच्चे अभी भी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। इनमें से 4 की हालत गंभीर बताई जा रही है। छपरा में हुई घटना के बाद से लोगों में जबर्दस्त गुस्सा है। लोगों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ उग्र विरोध-प्रदर्शन करते हुए कई जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की। छपरा में एक पुलिस वैन को भी आग के हवाले कर दिया गया। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घटना पर अफसोस जताते हुए हुए कमिश्नर और आईजी को मामले की जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, आरजेडी और बीजेपी ने इसे प्रशासन की लापरवाही करार देते हुए मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार का इस्‍तीफा मांगा है। गौरतलब है कि इस मामले के सामने आने के बाद से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मीडिया से मुखातिब नहीं हुए हैं।

Tuesday, 23 April 2013

दिल्‍ली रेप: सड़क से लेकर संसद तक फूटा आक्रोश, दोषियों को फांसी की मांग


नई दिल्‍ली : राष्ट्रीय राजधानी में पांच वर्षीय बच्ची से बलात्कार की घटना के विरोध में सोमवार को सड़क से लेकर संसद तक विरोध प्रदर्शन की गूंज रही। एक सुर से सभी ने बलात्‍कार के दोषी को फांसी देने की मांग की। उधर, बलात्कार मामले में दूसरे आरोपी प्रदीप कुमार को दिल्ली और बिहार पुलिस की टीम ने संयुक्त रूप से छापेमारी कर आज तड़के बिहार से उसके मामा के घर से गिरफ्तार कर लिया।

एक माह के मध्यावकाश के बाद संसद सत्र के दूसरे चरण का पहला दिन दोनों सदनों में हंगामे के साथ शुरू हुआ। सदस्यों ने दिल्ली में पांच वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म पर भारी चिंता जताई। बलात्कार की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए आज संसद में विभिन्न दलों के सदस्यों ने इस कृत्य के दोषियों को फांसी देने की मांग की। साथ ही सदस्यों ने यह भी कहा कि बलात्कार के मामलों की सुनवाई के लिए एक समय सीमा तय की जानी चाहिए। उधर, बच्ची से बलात्कार की घटना के विरोध में भाजपा कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन करते हुए संसद भवन तक पहुंच गए। वहीं, महिला संगठनों ने दिल्ली पुलिस आयुक्त और अन्य अधिकारियों को हटाने की मांग को लेकर आज संसद की ओर एक मार्च निकाला लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके अलावा, कई अन्‍य संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। 

प्रदर्शनकारी सुबह जंतर मंतर पर एकत्रित हुए थे और बाद में उन्होंने अपना मार्च शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने अवरोधक तोड़ने का प्रयास किया और संसद की ओर मार्च करना शुरू किया लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। वहीं, भाजपा कार्यकर्ता इस बर्बर बलात्कार कांड के विरोध में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और दिल्ली के पुलिस आयुक्त नीरज कुमार के इस्तीफे की मांग की रहे थे। पुलिस ने विरोध प्रदर्शन को देखते हुए संसद भवन परिसर के पास पंडित पंत मार्ग की घेराबंदी कर रखी थी, लेकिन दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विजय गोयल के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ता दूसरे रास्ते से संसद भवन के रकाबगंज सड़क वाले द्वार पर पहुंच गए। गोयल के नेतृत्व में भाजपा विधायकों समेत करीब 250 कार्यकर्ता संसद भवन के गेट पर धरने पर बैठ गए। भाजपा ने बच्चियों से बलात्कार करने वालों को मौत की सजा दिये जाने की मांग भी की। 

प्रदेश भाजपा प्रमुख ने कहा कि जब हमारी पार्टी सत्ता में आयेगी तब हम सभी को सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। गोयल ने कांग्रेस सांसद और शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने दिल्ली के पुलिस आयुक्त को हटाये जाने की मांग इसलिए की क्योंकि वह अपनी मां को बचाना चाहते हैं। पुलिस ने बाद में गोयल एवं उनके समर्थकों को हिरासत में ले लिया।

प्रदर्शनकारी महिला संगठनों प्रदर्शनकारी का नेतृत्व माकपा समर्थित आल इंडिया डेमोक्रेटिक वोमेंस एसोसिएशन (एआईडीडब्ल्यूए), अखिल भारतीय जनवादी महिला संगठन, नेशनल फेडरेशन फार इंडियन वोमेन (एनएफआईडब्ल्यू), आइसा, आल इंडिया प्रोग्रेसिव वोमेंस एसोसिएशन (एआईपीडब्ल्यूए) और स्टूडेंट्स फेडरेशन आफ इंडिया (एसएफआई) द्वारा किया जा रहा था। अखिल भारतीय जनवादी महिला संगठन की सदस्य रशपाल कौर ने कहा कि हम अधिकारियों को हटाए जाने से संतुष्ट नहीं हैं। हम मामले में विभागीय जांच चाहते हैं। हम इसके साथ ही एक प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारकर घायल करने वाले पुलिस अधिकारी की गिरफ्तारी की मांग करते हैं। एआईपीडब्ल्यूए सदस्य कविता कृष्णन ने कहा कि हम गृह मंत्री और उप राज्यपाल से मिलने जा रहे हैं और हम दोषी पुलिस अधिकारियों को हटाने की मांग करेंगे जिन्होंने लड़की के अभिभावकों की शिकायत दर्ज नहीं की थी। प्रदर्शकारियों ने सिलचर में एक और बलात्कार की खबर के मद्देनजर गृह मंत्री के त्यागपत्र की मांग की। 

राज्यसभा में पांच वर्ष की बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म एवं बर्बरता के मुद्दे पर चर्चा हुई। राज्यसभा के अधिकतर सदस्यों ने बच्ची के साथ दुष्कर्म के आरोपियों को मृत्युदंड दिए जाने की मांग की। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती, दुष्कर्म एवं बर्बरता की शिकार बच्ची की हालत में जहां सुधार हो रहा है, वहीं इस कुकृत्य के खिलाफ दिल्लीभर में व्यापक प्रदर्शन किए जा रहे हैं। 

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की नेता मायावती ने कहा कि हमने बजट सत्र के प्रथम चरण में एक सख्त कानून का निर्माण किया, लेकिन अब उसमें संशोधन किए जाने और उसे ज्यादा सख्त बनाए जाने की आवश्यकता है। इस तरह के मामलों में सुनवाई के लिए निश्चित समयसीमा निर्धारित की जानी चाहिए और अपराधियों को मृत्युदंड दिया जाना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्य माया सिंह ने भी मायावती का समर्थन किया और बच्चों के साथ दुष्कर्म के अपराधियों को तत्काल मृत्युदंड दिए जाने की मांग की।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की बात का हवाला देते हुए माया सिंह ने कहा कि देश में महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। सोनिया गांधी ने इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कार्रवाई किए जाने की मांग की थी। माया ने दुष्कर्म रोधी विधेयक को और ज्यादा सख्त किए जाने की मांग की और सवालिया लहजे में कहा कि सत्ता किसके हाथ में है? कार्रवाई कौन करेगा? मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि दुष्कर्म और अपराधों में इजाफा पुलिस की कार्यप्रणाली पर ही प्रश्न नहीं खड़ा करता बल्कि समाज में बढ़ रहे भ्रष्टाचार और कुछ बहुत ही गंभीर खामियों की तरफ इशारा करता है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे ठीक करने के लिए सदन को अवश्य ही कुछ करना चाहिए।

येचुरी ने बढ़ते अपराधों के लिए समाज में व्याप्त पितृसत्तात्मक संस्कृति को भी जिम्मेदार ठहराया। 

समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्य रामगोपाल यादव ने कहा, "हमें उन कारणों की तलाश करनी होगी जो लोगों के मस्तिष्क को प्रदूषित कर रहे हैं। लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने एक वक्तव्य दिया। शिंदे ने कहा कि संयुक्त पुलिस आयुक्त (सतर्कता) को मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। वह इस मामले में स्थानीय पुलिस पर पीड़िता के पिता को मामला दबाने के लिए रुपये दिए जाने के आरोपों की भी जांच करेंगे। इस दौरान भाजपा सदस्यों ने शिंदे के इस्तीफे की मांग करते हुए खूब शोर-शराबा किया, जिसके कारण लोकसभा की कार्यवाही कई बार बाधित हुई और उसके बाद दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। 

दिल्ली में ही पिछले वर्ष 16 दिसम्बर को हुए सामूहिक दुष्कर्म की घटना को याद करते हुए लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि इस तरह की घटनाओं पर सिर्फ कानून के जरिए काबू नहीं पाया जा सकता। बच्चों एवं महिलाओं के साथ होने वाले इस तरह के आमनवीय कुकृत्यों पर समाज और लोगों की मानसिकता में परिवर्तन लाकर ही लगाम लगाया जा सकता है। निश्चित ही मेरे साथ इस सदन के सभी सदस्य इस बर्बरतापूर्ण घटना की निंदा करते हैं और बच्ची के शीघ्र स्वस्थ होने की ईश्वर से प्रार्थना करते हैं। 

उधर, राष्ट्रीय राजधानी में एक सप्ताह पहले पांच साल की एक बच्ची का बड़ी दरिंदगी से बलात्कार करने के मामले में दूसरे आरोपी प्रदीप कुमार को दिल्ली और बिहार पुलिस की टीम ने संयुक्त रूप से छापेमारी कर आज तड़के लखीसराय जिले के बरहिया से उसके मामा के घर से गिरफ्तार कर लिया । मुख्य आरोपित की गिरफ्तारी के दो दिन बाद गिरफ्तार 19 वर्षीय अशिक्षित प्रदीप कुमार ने इसे अपनी ‘बड़ी गलती’ बताया। पुलिस ने बताया कि जांचकर्ताओं ने दूसरे संदिग्ध प्रदीप को बिहार के लखीसराय जिले में बढैया गांव से उसके मामा के घर से गिरफ्तार किया। प्रदीप का नाम मामले के पहले संदिग्ध मनोज कुमार ने लिया था। बिहार के पुलिस महानिदेशक अभयानंद ने बताया कि दिल्ली पुलिस के दल ने बिहार पुलिस के विशेष कार्यबल की मदद से प्रदीप को उसके मामा के घर से गिरफ्तार किया। वहां की एक अदालत ने उसे 15 दिन के ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया। दिल्ली पुलिस आयुक्त नीरज कुमार ने यहां संवाददाताओं से कहा कि हमें बिहार से (में अपनी टीम से) सूचना मिली है कि प्रदीप ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। वह अशिक्षित है। दरभंगा अदालत से ट्रांजिट रिमांड लेने के बाद उसे आज दिल्ली लाया जाएगा।

इससे पहले, पांच वर्षीय बच्ची से बलात्कार के खिलाफ प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए दिल्ली मेट्रो ने पुलिस के निर्देश पर आज दो और स्टेशन बंद कर दिए ताकि इंडिया गेट और प्रधानमंत्री आवास के नजदीक भीड़ को इकट्ठा होने से रोका जा सके लेकिन शाम में उन्हें फिर से खोल दिया गया।