Monday, 29 April 2013

सरबजीत को इलाज के लिए विदेश नहीं भेजेगा पाक, भारत ने अपने ही नेताओं को लगाई लताड़

लाहौर/नई दिल्ली. भारत में चीन की एक और घुसपैठ व अफगानिस्‍तान को अमेरिका की ओर से रिश्‍वत दिए जाने की खबरों के बीच पाकिस्‍तान से भारत के लिए निराशाजनक खबरें आ रही हैं। कोट लखपत जेल में हमले से घायल सरबजीत की जान से पाकिस्‍तान खिलवाड़ कर रहा है तो भारत भी इस मसले पर गंभीर नही दिखाई दे रहा है। सरबजीत की बचने की उम्मीद कम है। 48 घंटे बाद भी उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ है। उसे ब्रेन हेमरेज का खतरा बना हुआ है।

सरबजीत के परिवार वालों की मांग है कि उन्‍हें इलाज के लिए भारत भेजा जाए। लेकिन इसकी संभावना नहीं लगती, क्‍योंकि पाकिस्‍तान सरकार ने सरबजीत के स्‍वास्‍थ्‍य पर नजर रखने के लिए चार डॉक्‍टरों का जो पैनल बनाया था उसने इसके खिलाफ सिफारिश की है। पैनल ने कहा है कि सरबजीत इलाज के लिए विदेश भेजने की जरूरत नहीं है। भाजपा और सपा ने सरबजीत को भारत लाकर बेहतर इलाज मुहैया कराने की मांग की है जबकि केंद्र सरकार में मंत्री राजीव शुक्‍ल का कहना है कि इस मसले को बेवजह तूल दिया जा रहा है।

पाकिस्तान पहुंची सरबजीत की बहन, पत्नी और बेटियों ने कड़ी सुरक्षा के बीच अस्पताल जाकर आईसीयू की खिड़की से सरबजीत को देखा। इस दौरान बेटियां भावुक हो गईं। परिवार के किसी को भी सदस्य को सरबजीत के नजदीक नहीं जाने दिया गया। डॉक्टरों का कहना है कि इससे सरबजीत और परिवार को दिक्कत हो सकती है।

जिन्ना अस्पताल को सब-जेल में तबदील कर दिया गया है। आईसीयू के आसपास किसी को जाने नहीं दिया जा रहा। अस्पताल में जगह-जगह हथियारबंद पुलिसबल तैनात किया गया है।

Saturday, 27 April 2013

चीन दे रहा है चुनौती, 19 किलोमीटर तक किया घुसपैठ


नई दिल्ली। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ कर जमी चीनी सेना ने भारतीय हद में 19 किमी भीतर अपना तंबू गाड़ा है। यह बात रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने रक्षा संबंधी संसदीय समिति के सामने रखी। हालांकि बताया जाता है कि अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराए जाने को लेकर समिति सदस्यों ने असंतोष भी जताया है। इस बीच, रक्षा मंत्री एके एंटनी ने विवाद के सुलझने की उम्मीद जताते हुए कहा कि समाधान निकालने के लिए चीन के साथ कई स्तर पर बातचीत चल रही है।

रक्षा संबंधी समिति ने शुक्रवार दोपहर हुई बैठक में मंत्रालय के अधिकारियों से चीनी घुसपैठ को लेकर जवाब-तलब किए। सूत्रों के मुताबिक रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा की अगुआई में पहुंचे मंत्रालय व सैन्य अधिकारियों ने समिति के सदस्यों को बताया कि स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है। हालात की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराने पर असंतुष्ट समिति सदस्यों ने मामले पर जवाब देने के लिए मंत्रालय के अधिकारियों को 30 अप्रैल को फिर बुलाया है। मंत्रालय व सैन्य अधिकारियों ने समिति को बताया कि 16 अप्रैल को भारतीय गश्ती दल ने चीनी सैनिकों के टेंट लगे होने की खबर दी थी। यह टेंट लद्दाख के दिपसांग इलाके में दौलत बेग ओल्डी के नजदीक है।

मामले को फ्लैग मीटिंग के अलावा कूटनीतिक माध्यमों से उठाया गया है और समाधान की कोशिश हो रही है। इससे पहले संसद परिसर में मीडिया के सवालों पर रक्षा मंत्री एंटनी ने भी कहा कि समाधान के लिए कई स्तर पर बातचीत हो रही है। सेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह ने ताजा स्थिति पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन के साथ बैठक की। महत्वपूर्ण है कि भारतीय सैनिकों का दस्ता भी चीनी सैनिकों के साथ आमने-सामने की स्थिति में जमा है। वहीं भारतीय वायुसेना ने इलाके में राशन व रसद संबंधी सामान्य उड़ानें शुरू कर दी हैं। चीनी सैनिकों के भारतीय हद में तंबू चौकी बनाने के बाद वायुसेना ने कुछ समय के लिए उड़ानों को रोक दिया था।

गौरतलब है कि चीनी तंबू 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान बनाई गई दौलत बेग ओल्डी की हवाई पट्टी के नजदीक है। भारतीय वायुसेना ने हाल में इस पट्टी को बड़े विमानों के संचालन के लिए तैयार किया था।

लाहौर जेल में हमले के बाद सरबजीत सिंह डीप कोमा में


लाहौर/अलमाटी : सरबजीत सिंह ‘डीप कोमा’ में हैं, हालत स्थिर होने तक किसी तरह की सर्जरी नहीं की जा सकती। पाकिस्तान के आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। पाकिस्तान में मौत की सजा का सामना कर रहे सरबजीत सिंह लाहौर की एक जेल में दो कैदियों के हमले के बाद शुक्रवार रात ‘कोमा’ में चले गए थे। पाकिस्तानी चिकित्सकों ने आज सुबह भारतीय अधिकारियों को यह जानकारी दी थी। 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरूद्दीन ने कहा कि सरबजीत सिंह की देखभाल कर रहे चिकित्सकों ने बताया है कि वह वेंटीलेटर पर कोमा में हैं और उनकी आईवी चल रही है। आईवी के तहत नसों के जरिए शरीर के अंदर दवा पहुंचाई जाती है।

उन्होंने बताया कि इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के अधिकारी लाहौर स्थित जिन्ना अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में रात दो बजे सरबजीत तक पहुंच स्थापित कर सके। यह हमला उस समय हुआ जब सरबजीत (49) और अन्य कैदियों को एक घंटे के लिए उनकी कोठरी से बाहर ले जाया जा रहा था। दो कैदियों ने सरबजीत पर कुंद वस्तुओं से वार किया, जिससे उनके सिर पर गंभीर चोट लगी। लाहौर में अधिकारियों ने बताया कि सरबजीत को शुरुआत में जेल के भीतर बने अस्पताल ले जाया गया लेकिन हालत बिगड़ने के बाद उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

सरबजीत को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में 1990 में हुए बम धमाकों में कथित तौर पर संलिप्त रहने के आरोप में दोषी ठहराया गया था। इन धमाकों में 14 लोगों की मौत हो गई थी। सरबजीत की दया याचिकाओं को पाकिस्तानी न्यायालयों और पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने खारिज कर दिया था। पीपीपी नीत पाकिस्तान सरकार ने सरबजीत की फांसी 2008 में अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी थी। सरबजीत के परिवार का कहना है कि वह अनजाने में सीमा पार भटक गए थे और वह गलत पहचान का शिकार हो गए।

Friday, 26 April 2013

क्या गुल खिलाएगी बाबा रामदेव-मोदी की जोड़ी


देवभूमि में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की आमद की आहट ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मोदी की यह यात्रा यूं तो गैरराजनीतिक है, लेकिन इसके राजनीतिक मायने भी निकलकर सामने आ रहे हैं। खासकर, राजनीतिक दल बनाने की घोषणा कर चुके बाबा के मोदी प्रेम से भाजपाई जरूर राहत महसूस कर रहे होंगे। मोदी के माध्यम से ही सही, एक ऐसे राजनीतिक दल का गठन रुक सकेगा, जो भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगा सकता है।

कांग्रेस के साथ छत्तीस का आंकड़ा बनने से पहले, यानी मई-जून 2011 तक बाबा रामदेव की पतंजलि योगपीठ में भाजपा ही नहीं, सभी सियासी पार्टियों के बड़े नेताओं का आना-जाना निहायत सामान्य सी बात हुआ करती थी, लेकिन काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबा की मुहिम के बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई। पिछले दो सालों में संभवतया राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले राजनेताओं में मोदी ही ऐसे अकेले राजनेता हैं, जिनका कार्यक्रम बाबा की योगपीठ में बना है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो 2014 के लोकसभा आम चुनाव इसका मुख्य कारण हैं।

मोदी की राष्ट्रीय राजनीति में दस्तक के बाद भाजपा के अंदरूनी समीकरण चाहे जैसी भी शक्ल लें, लेकिन इतना तो तय है कि मोदी लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए अहम रोल में रहेंगे। मोदी इस भूमिका के लिए सुविचारित रणनीति के तहत अपने कदम बढ़ा रहे हैं। समाज के अलग-अलग तबकों के बीच जिस तरह उन्होंने अपनी बात अब तक रखी है, उससे इसकी पुष्टि भी होती है। बाबा रामदेव के कार्यक्रम में संत समाज से रूबरू होने के लिए मोदी के हरिद्वार आने को भी इसी रणनीति का एक हिस्सा माना जा रहा है। वैसे भी भाजपा में अग्रिम पंक्ति में अपनी भूमिका सुनिश्चित करने के लिए मोदी के लिए यह जरूरी है कि संत समाज का आशीर्वाद भी उनके पास हो।

मोदी की बाबा से जुगलबंदी के बाद अब इस बात की संभावना काफी कम मानी जा रही है कि बाबा रामदेव आगामी लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दल का गठन करें। दरअसल, बाबा अक्सर राजनीतिक दल बनाने की बात तो करते हैं, मगर साथ ही भाजपा में नरेंद्र मोदी की पैरवी भी खुलकर करते रहे हैं। इससे समझा जा रहा है कि अगर मोदी को पार्टी प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में पेश करने को तैयार हो जाती है तो शायद बाबा फिलहाल अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को विराम दे दें। मोदी की हरिद्वार यात्रा इस लिहाज से भी खासी अहम साबित हो सकती है।

कोल घोटाले की जांच में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की हुई अनदेखी


नई दिल्ली : कोल ब्लॉक आवंटन में अनियमितता की जांच को लेकर सीबीआई ने आज सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा पेश किया। सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा ने दो पन्नों के इस हलफनामे में माना है कि उन्होंने इस मुद्दे पर बनी स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करने से पहले पीएमओ, कानून मंत्री और कोयला मंत्रालय के संयुक्त सचिव को दिखाई थी। लेकिन उन्होंने यह नहीं माना कि इसमें कोई बदलाव किया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 30 अप्रैल को होगी।

संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे को लेकर आज खूब हंगामा हुआ जिसके चलते दोनों सदनों की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। भाजपा ने अपने हमले तेज करते हुए कहा है कि सीबीआई निदेशक के हलफनामे के बाद सरकार बेनकाब हो गई है। सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट का अपमान किया है। देश जानना चाहता है कि कोयला घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है या सरकार कर रही है। भाजपा ने कहा कि जो जांच के घेरे में थे उन्हें ही जांच रिपोर्ट दिखाई गई।

सुप्रीम कोर्ट को पिछले महीने दी गई अपनी रिपोर्ट में सीबीआई ने कहा था कि सरकार ने कंपनियों के वित्तीय और दूसरे रिकार्ड्स को सही तरीके से नहीं देखा था, जिस वजह से सरकार को इसके लाइसेंस बंटवारे में घाटा हुआ। सरकार की मुश्किलें इसलिए भी हैं, क्योंकि जिस समय का यह मामला है उस दौरान कोयला मंत्रालय का प्रभार खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास था।

Wednesday, 24 April 2013

चिटफंड घोटाला : लुटे निवेशकों के लिए 500 करोड़ का राहत कोष


कोलकाता : शारदा ग्रुप द्वारा संचालित चिटफंड कंपनी में निवेश कर धन गंवाने वाले निवेशकों को राहत देने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार 500 करोड़ रुपए के राहत कोष का गठन करेगी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस आशय की घोषणा की है। बनर्जी ने इस कोष के लिए धन मुहैया कराने के लिए सिगरेट पर 10 प्रतिशत कर लगाने की भी घोषणा की।

राज्य सचिवालय राइटर्स बिल्डिंग में संवाददाताओं से बातचीत में सूबे की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, `हम अपना धन गंवाने वाले छोटे एवं मझोले निवेशकों के लिए 500 करोड़ रुपए के राहत कोष का गठन करेंगे। इससे परेशान आम लोगों को मदद मिलेगी। इस कोष के लिए धन जुटाने के वास्ते हम सिगरेट पर 10 प्रतिशत कर लगाएंगे। इससे हमें 150 करोड़ रुपए की आय होगी। शेष राशि जुटाने के लिए हम अन्य संसाधनों का सहारा लेंगे।`

बनर्जी ने कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीश श्यामलाल सेन की अध्यक्षता वाले आयोग की सिफारिश पर निवेशकों को कोष से भुगतान किया जाएगा। आरबीआई या अन्‍य केंद्रीय एजेंसियों की ओर से कार्रवाई न होने के सवाल पर ममता ने कहा कि चिटफंड घोटाले में किसी तरह से संलिप्‍पता पाए जाने पर तृणमूल कांग्रेस के सदस्‍यों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

पश्चिम बंगाल पुलिस का बचाव करते हुए ममता ने कहा कि पुलिस ने सुदीप्‍तो सेन के अलावा इस कंपनी के दो शीर्ष अधिकारियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। उन्‍होंने यह भी कहा कि चिटफंड संबंधी नियमन को लेकर एसेंबली का विशेष सत्र बुलाने के लिए वह तैयार हैं और इस मामले को लेकर जल्‍द ही चिटफंड संबंधी कानून बनाया जाएगा। नुकसान को कम करने की कोशिश के तहत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस डूबी हुई कंपनी के निवेशकों के लिए 500 करोड़ रूपए का राहत कोष बनाने का ऐलान किया। वहीं, आयकर विभाग इस मामले में सभी लेनदेन की जांच करेगी। 

शारदा ग्रुप के अध्यक्ष के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हम नहीं जानते थे कि वह आदमी धोखेबाज है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी और शारदा ग्रुप के बीच कोई रिश्ता नहीं हैं इस बीच सुदिप्त सेन और शारदा के दो अन्य अधिकारियों को लेकर पश्चिम बंगाल पुलिस कोलकाता रवाना हो गई। इन्हें कल जम्मू कश्मीर के गंदेरबल से गिरफ्तार किया गया था और वहां की अदालत से चार दिन का पारगमन रिमांड मिलने के बाद पुलिस इन्हें दिल्ली के रास्ते यहां लाने के लिए लेकर निकल पड़ी। कांग्रेस ने कहा कि घोटाले की सीबीआई जांच होनी चाहिए क्योंकि इसमें तृणमूल कांग्रेस और अन्य पार्टियों के नेताओं के शामिल रहने की खबर है।

पीछे हटने के बजाय चीन दिखा रहा है तेवर


नई दिल्ली।। पिछले 10 दिनों से लद्दाख क्षेत्र में चीनी सेना की घुसपैठ को लेकर तनाव चरम पर पुहुंचता जा रहा है। चीनी सैनिकों को पीछे हटाने की भारत की मांग को चीन ने एक बार फिर खारिज करते हुए साफ कह दिया है कि उसने वास्तविक नियंत्रण रेखा का उल्लंघन कर भारतीय इलाके में जरा भी घुसपैठ नहीं की है। इस बीच, चुमार क्षेत्र में दो चीनी हेलिकॉप्टरों ने भारतीय वायुसीमा का भी उल्लंघन किया है। इसके बावजूद भारत सरकार फिलहाल बातचीत जारी रखने के संकेत दे रही है। हालांकि, लद्दाख में घुसपैठ की समस्या से निपटने के लिए सेना ने सरकार को विभिन्न सैन्य विकल्पों के बारे में बताया है। 

भारत की ओर से कई स्तरों पर मसले को सुलझाने की कोशिशें बुधवार को जारी रहीं। रक्षा मंत्री ए. के . एंटोनी ने इसके संकेत भी दिए। सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिव शंकर मेनन ने चीन के स्टेट काउंसेलर यांग च्ये छी से बात की। बुधवार को चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने मसले को सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच सम्पर्क की बात कहते हुए भारत को यह सलाह भी दे डाली कि लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर अब तक जो समझौते हुए हैं, वह उनका सम्मान करे। भारतीय खेमा चीन की इन दलीलों को पहले ही खारिज कर चुका है। भारत का कहना है कि एलएसी को लेकर मतभेद हैं, लेकिन क्षेत्र में चीनी सेना की ताजा गतिविधि दर्ज की गई है, वह भारतीय क्षेत्र है। 

चीनी हेलिकॉप्टर भारतीय एयरस्पेस में इस बीच, लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र में टेंट चौकी बनाने के बाद लेह से 300 किमी दूर चुमार क्षेत्र में दो चीनी हेलिकॉप्टरों द्वारा वायुसीमा के भी उल्लंघन की घटना सामने आई है। आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को कहा कि चीनी हेलिकॉप्टर 21 अप्रैल को भारतीय वायुसीमा में घुसे और कुछ वक्त तक इलाके के ऊपर मंडराते रहे। ये हेलिकॉप्टर खाने-पीने के सामानों के केन, सिगरेट के पैकेट और अपनी स्थानीय भाषा में लिखे नोट गिराने के बाद लौट गए। पिछले साल सितंबर में भी इस तरह की घटना हुई थी, जब हेलिकॉप्टर से उतरे चीनी फौजियों ने भारतीय सेना के बनाए कुछ पुराने मोर्चे और टेंट तोड़ दिए थे। 

सेना के इस्तेमाल पर चर्चा सरकारी सूत्रों ने कहा कि सेना ने चीनी घुसपैठ के बारे में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के नेतृत्व वाले चीन अध्ययन समूह को सेना के इस्तेमाल सहित विभिन्न विकल्पों की जानकारी दी है जिसमें रक्षा, गृह और विदेश मंत्रालयों के सचिव शामिल हैं। चीन अध्ययन समूह को सुझाए गए सभी विकल्पों पर सावधानी से गौर किया जा रहा है और इस स्थिति में सभी संबंधित पक्षों से भी जानकारी ली गई है। सेना ने पांच लद्दाख स्काउट्स बटालियन से अपने सैनिकों को डीबीओ इलाके में भेज दिया है और वे वहां डेरा डाले हुए हैं। सेना जरूरत पड़ने पर और सैनिकों को वहां भेजने पर भी विचार कर रही है। 

दौरे पर संकट? मई के तीसरे सप्ताह में चीन के प्रधानमंत्री के प्रस्तावित भारत दौरे के मद्देनजर भारत की कोशिश है कि घुसपैठ के मसले को इतना तूल नहीं दिया जाए कि दौरे पर आंच आए। चीन के नए प्रधानमंत्री ली खछ्यांग अपने पहले विदेश दौरे पर आएंगे जिसे भारत में काफी अहमियत दी जा रही है। विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने टीवी चैनलों से बुधवार को जो कहा, उससे आभास मिल रहा है कि भारत इसे बड़ा मुद्दा नहीं बनाएगा। लेकिन विपक्ष ने बुधवार को सरकार से कई सवाल पूछ डाले। बीजेपी सांसद तरुण विजय ने सांसदों की विशेष बैठक बुलाने की मांग की जिसमें चीनी घुसपैठ के बारे में विदेश सचिव जानकारी दें। जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने सरकार से पिछले तीन वर्षो में चीनी सेना की ओर से वास्तविक नियंत्रण रेखा के पार घुसपैठ का ब्यौरा देने की मांग की। 

एक और फ्लैग मीटिंग सूत्रों के मुताबिक भारतीय सेना की ओर से लद्दाख में चीनी सैन्य अधिकारियों के साथ एक और फ्लैग मीटिंग का प्रस्ताव भारत ने रखा है। चीन ने इसकी पुष्टि नहीं की है लेकिन शुक्रवार को यह बैठक हो सकती है। मंगलवार को हुई दूसरे दौर की फ्लैग मीटिंग के दौरान चीन ने अपने सैनिकों को पीछे हटाने के लिए भारत के सामने कई शर्तें रखी हैं जो भारत को कतई मान्य नहीं होंगी। इस बीच, जम्मू कश्मी के अपने दौरे से लौटते वक्त आर्मी चीफ जनरल बिक्रम सिंह ने बुधवार को डोडा और अखनूर सेक्टर जाकर सुरक्षा स्थिति का जायजा लिया। भारत ने चीन की सीमा के पास पूर्वोत्तर क्षेत्र में वायु मार्ग से नीचे उतरने में सक्षम 1500 और सैनिकों को तैनात करने की योजना बनाई है। 

क्या चाहता है चीन? राजनयिक सूत्रों के मुताबिक चीन अपने सैनिकों को पीछे हटाने के लिए पूर्वी लद्दाख के इलाके में पिछले कुछ वर्षों में भारत की ओर से बनाई गई कुछ नई ढांचागत सुविधाओं और अग्रिम चौकियों को हटाने की मांग कर रहा है। गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख के न्योमा और फुकचे में एक हवाई पट्टी बनाने के बाद भारतीय वायुसेना ने दौलत बेग ओल्दी में भी एक हवाई पट्टी बनाई है, जहां से एएन-32 जैसे परिवहन विमान उतारे जा सकते हैं। इसके अलावा भारतीय सेना ने इस इलाके में कई अग्रिम सैन्य चौकियां भी बनाई हैं, जो भारतीय इलाके में है लेकिन चीन को यह पसंद नहीं आ रहा। 

1986 में भी हुई थी ऐसी हरकत भारत और चीन के बीच 4 हजार किलोमीटर लंबी एलएसी पर घुसपैठ की वारदात होती हैं लेकिन चीनी सैनिक टोके जाने के बाद पीछे चले जाते हैं। 1986 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि चीनी सैनिकों ने घुसपैठ करने के बाद अपनी चौकी स्थापित कर ली है। 1986 में अरुणाचल प्रदेश के इलाके में समदुरोंग छू घाटी में चीनी सैनिकों ने अपनी चौकी स्थापित कर ली थी जो भारतीय सेना की ओर से जवाबी चुनौती दिए जाने के बाद हटा ली गई थी।