नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि देश की राजनीति ‘सेक्युलराइटिस’ (धर्मनिरपेक्षता) से पीड़ित है। उन्होंने यहां कहा, ‘‘भारतीय राजनीति में सेक्युलराइटिस की बीमारी फैली हुई है। इंसेफलाइटिस की तरह सेक्युलराइटिस भी अत्यंत खतरनाक है।’’
राजनाथ ने यह टिप्पणी इसलिए की है क्योंकि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की धर्मनिरपेक्षता पर सवाल उठना जारी है। मोदी पार्टी की चुनाव प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष हैं और अगले आम चुनाव में प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार के रूप में उभरे हैं। मोदी पर 2002 में गोधरा कांड के बाद गुजरात में हुए दंगों में संलिप्तत रहने का आरोप लगाया जाता रहा है।
राजनाथ सिंह ने कांग्रेस महासचिव शकील अहमद पर भी निशाना साधा। अहमद ने 21 जुलाई को कहा था कि आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिदीन का गठन 2002 के गुजरात दंगों के बाद हुआ था। राजनानाथ ने कहा, ‘‘वे कहते हैं कि इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) का गठन गुजरात दंगों के बाद हुआ, मैं कांग्रेस के इस नेता (अहमद) से पूछना चाहता हूं कि क्या उनके पास आईएम की जन्मपत्री है। जिन लोगों को आईएम के बारे में ब्योरा चाहिए वे कांग्रेस मुख्यालय जाएं और इस नेता से मुलाकात करें।’’ राजनाथ सिंह ने कहा, ‘‘जैसे कि स्वतंत्र भारत में 2002 से से पहले कोई दंगा ही नहीं हुआ था।’’
Wednesday, 31 July 2013
Tuesday, 30 July 2013
इधर दुर्गा का निलंबन उधर दो दिन में माफिया ने बनाए करोड़ों
हिंडन और यमुना नदी में अवैध तरीके से बालू निकालने का खेल
बड़े पैमाने पर चल रहा है। खनन माफिया हर रोज सरकार को लाखों रुपये के
राजस्व का चूना लगाकर करोड़ों रुपये का खेल कर रहे हैं। एसडीएम दुर्गा
नागपाल के निलंबन एवं खनन निरीक्षक आशीष कुमार के तबादले के बाद से खनन
माफिया की चांदी कट रही है। पिछले दो दिन में सर्वाधिक अवैध खनन हुआ है।
सैकड़ों डंपर, जेसीबी मशीन, पॉपलेन और ट्रैक्टर ट्राली खनन में लगे हैं।
दूसरी ओर दनकौर ब्लॉक क्षेत्र के कादलपुर गांव में धार्मिक स्थल तोड़ने
जाने से ग्रामीणाों में गुस्सा बरकरार है।
एहतियातन सोमवार को भी गांव में पुलिस बल तैनात रहा। धार्मिक स्थल की जगह पर पुलिस मुस्तैद रही। गांव की गलियों में भी पुलिस ने गश्त की। कुछ ग्रामीणों ने धार्मिक स्थल पर निर्माण का सोमवार को फिर प्रयास किया। लेकिन पुलिस ने उन्हें हटा दिया। अवैध तरीके से बालू गोरखधंधा पिछले कई वर्षो से चला आ रहा है। जिस अधिकारी ने भी इसको रोकने के लिए खनन माफिया की गिरेबान में हाथ डाला, उसे खामियाजा भुगतना पड़ा।
कई अधिकारियों पर जानलेवा हमले भी हुए। सत्ता के दबाव में पुलिस प्रशासन खनन माफिया के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाया। खनन का खेल दिनभर मीडिया की सुर्खियों में रहने के बावजूद उन पर इसका कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने अन्य दिनों की भांति सोमवार को भी अपना गोरखधंधा बदस्तूर जारी रखा।
दरअसल उत्तराखंड में आई आपदा के बाद जून में यमुना का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति बन गई थी। बाढ़ के पानी के साथ बड़ी मात्र में बालू भी आ गया था। जलस्तर घटने के बाद बालू खेतों में जमा रह गया। इसको निकालने के लिए अब खनन माफिया में होड़ लगी हुई है। जैसे ही बारिश बंद होती है, खनन माफिया बांध के किनारे के खेतों से बालू निकालने में लग जाते हैं। जिला प्रशासन खनन माफिया पर कोई लगाम नहीं लगा पा रहा है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व का चूना लग रहा है। नियमानुसार 33 रुपये प्रति घन मीटर की रायल्टी जमा करने के बाद प्रशासन अनुमति प्रदान करता है।
अनुमति के बाद बालू का खनन किया जा सकता है। खनन माफिया नियमों की अनदेखी कर अपनी मनमर्जी से बालू चोरी कर रहे हैं।
सिर्फ एक के पास है अनुमति
जिला प्रशासन ने यमुना से बालू निकालने के लिए सिर्फ रायपुर गांव में एक व्यक्ति को अनुमति दे रखी है। बाकी जगहों पर अवैध खनन हो रहा है। यमुना के किनारे के लगभग सभी गांवों से बालू का अवैध खनन हो रहा है। प्रतिदिन करीब ढाई सौ डंपर, जेसीबी मशीन व ट्रैक्टर ट्राली बालू निकालने में लगे रहते हैं।
सत्ता के दबाव में नहीं बनी सूची जिलाधिकारी रविकांत सिंह ने अप्रैल में अधीनस्थ आला अफसरों को खनन माफिया की सूची बनाकर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। सूत्रों का कहना है कि एसडीएम दुर्गा नागपाल ने कई सफेदपोश नेताओं के नाम इस सूची में शामिल किए थे, लेकिन सत्ता के दबाव में सूची जारी नहीं हो सकी।
पूर्व में नियुक्त अधिकारियों पर हो चुका है हमला
कई बार खनन माफिया में आपस में भी गोली चल चुकी है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश के खनन माफिया में भी खूनी खेल खेला जा चुका है। गत वर्ष तत्कालीन एसडीएम सदर व खनन निरीक्षक आशीष कुमार पर भी बालू का अवैध धंधा करने वालों ने हमला किया था।
एहतियातन सोमवार को भी गांव में पुलिस बल तैनात रहा। धार्मिक स्थल की जगह पर पुलिस मुस्तैद रही। गांव की गलियों में भी पुलिस ने गश्त की। कुछ ग्रामीणों ने धार्मिक स्थल पर निर्माण का सोमवार को फिर प्रयास किया। लेकिन पुलिस ने उन्हें हटा दिया। अवैध तरीके से बालू गोरखधंधा पिछले कई वर्षो से चला आ रहा है। जिस अधिकारी ने भी इसको रोकने के लिए खनन माफिया की गिरेबान में हाथ डाला, उसे खामियाजा भुगतना पड़ा।
कई अधिकारियों पर जानलेवा हमले भी हुए। सत्ता के दबाव में पुलिस प्रशासन खनन माफिया के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाया। खनन का खेल दिनभर मीडिया की सुर्खियों में रहने के बावजूद उन पर इसका कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने अन्य दिनों की भांति सोमवार को भी अपना गोरखधंधा बदस्तूर जारी रखा।
दरअसल उत्तराखंड में आई आपदा के बाद जून में यमुना का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति बन गई थी। बाढ़ के पानी के साथ बड़ी मात्र में बालू भी आ गया था। जलस्तर घटने के बाद बालू खेतों में जमा रह गया। इसको निकालने के लिए अब खनन माफिया में होड़ लगी हुई है। जैसे ही बारिश बंद होती है, खनन माफिया बांध के किनारे के खेतों से बालू निकालने में लग जाते हैं। जिला प्रशासन खनन माफिया पर कोई लगाम नहीं लगा पा रहा है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व का चूना लग रहा है। नियमानुसार 33 रुपये प्रति घन मीटर की रायल्टी जमा करने के बाद प्रशासन अनुमति प्रदान करता है।
अनुमति के बाद बालू का खनन किया जा सकता है। खनन माफिया नियमों की अनदेखी कर अपनी मनमर्जी से बालू चोरी कर रहे हैं।
सिर्फ एक के पास है अनुमति
जिला प्रशासन ने यमुना से बालू निकालने के लिए सिर्फ रायपुर गांव में एक व्यक्ति को अनुमति दे रखी है। बाकी जगहों पर अवैध खनन हो रहा है। यमुना के किनारे के लगभग सभी गांवों से बालू का अवैध खनन हो रहा है। प्रतिदिन करीब ढाई सौ डंपर, जेसीबी मशीन व ट्रैक्टर ट्राली बालू निकालने में लगे रहते हैं।
सत्ता के दबाव में नहीं बनी सूची जिलाधिकारी रविकांत सिंह ने अप्रैल में अधीनस्थ आला अफसरों को खनन माफिया की सूची बनाकर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। सूत्रों का कहना है कि एसडीएम दुर्गा नागपाल ने कई सफेदपोश नेताओं के नाम इस सूची में शामिल किए थे, लेकिन सत्ता के दबाव में सूची जारी नहीं हो सकी।
पूर्व में नियुक्त अधिकारियों पर हो चुका है हमला
कई बार खनन माफिया में आपस में भी गोली चल चुकी है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश के खनन माफिया में भी खूनी खेल खेला जा चुका है। गत वर्ष तत्कालीन एसडीएम सदर व खनन निरीक्षक आशीष कुमार पर भी बालू का अवैध धंधा करने वालों ने हमला किया था।
Monday, 29 July 2013
मोदी विरोधी चिट्ठी में हस्ताक्षर असली
वाशिंगटन। भाजपा चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष व गुजरात के मुख्यमंत्री
नरेंद्र मोदी को अमेरिकी वीजा नहीं देने के लिए राष्ट्रपति बराक ओबामा को
भारतीय सांसदों के पत्र भेजने के विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। दस्तावेजों
की असलियत की जांच करने वाले कैलिफोर्निया के फोरेंसिक दस्तावेज परीक्षक
से प्रमाणित कर दिया है कि पत्रों पर सांसदों के हस्ताक्षर असली हैं और
जैसा दावा किया गया था कि हस्ताक्षर के साथ कट पेस्ट करके जालसाजी की गई
है, वैसा नहीं है।
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि फोरेंसिक जांच के तरीकों और स्वीकार्य सिद्धांतों का इस्तेमाल करते हुए मेरी राय यह है कि राज्यसभा के सदस्यों का तीन पृष्ठों का पत्र एक ही बार में तैयार हुआ है और उस पर गिली स्याही से जो हस्ताक्षर हैं वे असली और प्रामाणिक हैं। लोकसभा के सदस्यों के पत्र के मामले में भी यही कहा गया है।
राज्यसभा और लोकसभा के सदस्यों की ओर से क्रमश: गत 26 नवंबर और पांच दिसबंर को ये पत्र भेजे गए थे। ये पत्र ही इस साल 21 जुलाई को ह्वाइट हाउस फिर फैक्स के जरिये भेजे गए। इसकी हस्तलिपि की फोरेंसिक जांच नानेटे एम बार्टो ने कैलिफोर्निया में की। यह जांच मोदी के खिलाफ मुहिम चलाने वाले संगठन 'कोएलिशन अगेंस्ट जेनोसाइड' की आग्रह पर तब की गई जब कुछ भारतीय सांसदों (जिनमें माकपा के सीताराम येचुरी, भाकपा के एमपी अच्युतन और द्रमुक के केपी रामालिंगम भी थे) ने ओबामा को भेजे पत्र पर अपना हस्ताक्षर होने से इन्कार किया। सीएजी में अमेरिका के करीब 40 भारतीय अमेरिकी संगठन शामिल हैं।
यह संगठन मोदी को अमेरिकी वीजा नहीं देने के लिए अभियान चला रहा है। जब इस फोरेंसिक जांच की रिपोर्ट पर सांसद अच्युतन की प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा कि उन्हे याद नहीं है कि उन्होंने इस तरह के किसी पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।
रामालिंगम ने कहा कि यह विशेषाधिकार का मामला है और यह राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी को दिया जाएगा। मैं पहले ही कह चुका हूं कि मैंने पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किया। येचुरी ने कहा था कि उनके हस्ताक्षर को कट पेस्ट किया है, उनकी इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया हासिल नहीं हो सकी।
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि फोरेंसिक जांच के तरीकों और स्वीकार्य सिद्धांतों का इस्तेमाल करते हुए मेरी राय यह है कि राज्यसभा के सदस्यों का तीन पृष्ठों का पत्र एक ही बार में तैयार हुआ है और उस पर गिली स्याही से जो हस्ताक्षर हैं वे असली और प्रामाणिक हैं। लोकसभा के सदस्यों के पत्र के मामले में भी यही कहा गया है।
राज्यसभा और लोकसभा के सदस्यों की ओर से क्रमश: गत 26 नवंबर और पांच दिसबंर को ये पत्र भेजे गए थे। ये पत्र ही इस साल 21 जुलाई को ह्वाइट हाउस फिर फैक्स के जरिये भेजे गए। इसकी हस्तलिपि की फोरेंसिक जांच नानेटे एम बार्टो ने कैलिफोर्निया में की। यह जांच मोदी के खिलाफ मुहिम चलाने वाले संगठन 'कोएलिशन अगेंस्ट जेनोसाइड' की आग्रह पर तब की गई जब कुछ भारतीय सांसदों (जिनमें माकपा के सीताराम येचुरी, भाकपा के एमपी अच्युतन और द्रमुक के केपी रामालिंगम भी थे) ने ओबामा को भेजे पत्र पर अपना हस्ताक्षर होने से इन्कार किया। सीएजी में अमेरिका के करीब 40 भारतीय अमेरिकी संगठन शामिल हैं।
यह संगठन मोदी को अमेरिकी वीजा नहीं देने के लिए अभियान चला रहा है। जब इस फोरेंसिक जांच की रिपोर्ट पर सांसद अच्युतन की प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा कि उन्हे याद नहीं है कि उन्होंने इस तरह के किसी पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।
रामालिंगम ने कहा कि यह विशेषाधिकार का मामला है और यह राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी को दिया जाएगा। मैं पहले ही कह चुका हूं कि मैंने पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किया। येचुरी ने कहा था कि उनके हस्ताक्षर को कट पेस्ट किया है, उनकी इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया हासिल नहीं हो सकी।
Saturday, 27 July 2013
अभी चुनाव हुए तो NDA सबसे बड़ा गठबंधन: सर्वे
नई दिल्ली।। यदि देश में आम चुनाव अभी होते हैं तो किसी भी पार्टी या
गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा। जनादेश हंग पार्ल्यामेंट के पक्ष में
होगा। कांग्रेस नेतृत्व वाला यूपीए गठबंधन (यूनाइडेट प्रोग्रेसिव अलायंस)
और बीजेपी नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन(नैशनल डेमोक्रैटिक अलायंस) साधारण
बहुमत से पीछे रह जाएंगे। 172-180 से सीटें हासिल कर एनडीए सबसे बड़े
गठबंधन के रूप में उभरेगा। हालांकि, मनमोहन सरकार पर लगे करप्शन के तमाम
आरोपों के बावजूद बीजेपी के पक्ष में कोई बड़ी लहर नहीं दिख रही है। करीब
200 सीटों पर उन पार्टियों का कब्जा होगा जो न तो यूपीए में और न ही एनडीए
में। पीएम के रूप में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों की पहली
पसंद हैं। 19 फीसदी लोग मोदी को पीएम के रूप में देखना चाहते हैं। वहीं, 12
फीसदी लोगों की पसंद के साथ राहुल गांधी पीएम के रूप में लोगों की दूसरी
पसंद हैं। सीएसडीएस-द दिन्दू और सीएनएनआईबीएन के ओपिनियन पोल से हंग
पार्ल्यामेंट की तस्वीर उभरकर सामने आ रही है। कांग्रेस को भारी नुकसान
होने वाला है। हालांकि, कांग्रेस के नुकसान का फायदा बीजेपी को पूरी तरह से
नहीं मिल रहा है। दोनों गठबंधन यूपीए और एनडीए का वोट शेयर 29 पर्सेंट
रहेगा। लेकिन, सीटों पर कब्जे के मामले में एनडीए आगे रहेगा। एनडीए को 172
से 180 सीटों पर कामयाबी मिल सकती है, वहीं यूपीए 149-153 पर सिमट जाएगा।
जहां तक सिंगल पार्टी की बात है बीजेपी 2009 के मुकाबले फायदे में रहेगी।
अभी चुनाव हुए तो बीजेपी को 156-164 सीटों पर कामयाबी मिल सकती है, वहीं
कांग्रेस को महज 131 से 139 सीटों पर संतोष करना होगा। अगर अभी चुनाव हों
तो किसको मिलेंगी कितनी सीटें:- एनडीए: 172-180 यूपीए: 149-157 लेफ्ट:
22-88 टीमसी: 23-27 एसपी: 17-21 बीएसपी: 15-19 एडीएमके: 16-20 जेडीयू:
15-19 बीजेडी: 12-16 वाईएसआर कांग्रेस: 11-15 आरजेडी: 8-12 अन्य : बाकी बची
सीटें
Thursday, 25 July 2013
कांग्रेसी नेता का हास्यास्पद बयान, 12 रुपए में उपलब्ध है पूरा भोजन!
नई दिल्ली: कांग्रेस प्रवक्ता राज बब्बर ने कहा कि आज भी मुंबई में पूरा
भोजन 12 रुपए में करना संभव है जिसे भाजपा ने हास्यास्पद करार दिया। बब्बर
ने एआईसीसी ब्रीफिंग में सवालों के जवाब में यह बात समझाने की कोशिश करते
हुए कही कि कीमतों में इजाफे के बावजूद गरीबी घटी है। कांग्रेस प्रवक्ता से
गरीबी निर्धारण करने के लिए व्यय सीमा के निम्न कटआफ के बारे में भी पूछा
गया था और यह भी पूछा गया था कि कैसे कोई गरीब 28 रुपए या 32 रुपए के प्रति
दिन खर्च पर दो वक्त पूरा भोजन ग्रहण करने में सक्षम हो सकते हैं।
बब्बर ने कहा, ‘‘लोगों को दिन में दो वक्त पूरा भोजन मिलना चाहिए। वे कैसे हासिल कर सकते हैं, यह एक बहुत अच्छा सवाल है जिसे आपने पूछा है। आज भी मुंबई शहर में मैं 12 रुपए में एक पूरा भोजन पा सकता हूं। नहीं नहीं, बड़ा पाव नहीं। ढेर सारा चावल, दाल, सांभर और कुछ सब्जियां भी मिली हैं।’’ बब्बर ने इसके साथ ही कहा कि वह यह नहीं कह रहे हैं कि यह अच्छा है।
एनडीटीवी पर इस टिप्पणी का मजाक उड़ाते हुए भाजपा की एक टेलीविजन पैनलिस्ट ललिता के. मंगलम ने कहा कि कांग्रेस प्रवक्ता की यह बात हंसने लायक है। सब्जियों खास कर टमाटर की बढ़ती कीमतों के बारे में एक सवाल पर बब्बर ने कहा, ‘‘अगर आप टमाटर से गरीबी का आकलन करेंगे तो यह मुश्किल होगा। शहरों में आप टमाटर नहीं खाएं, लेकिन गांवों में गरीब लोग टमाटर तोड़ते हैं और खाते हैं। मुझे बताएं कि क्या वह अमीर हैं या गरीब। बहरहाल, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह ‘‘गरीबी की परिभाषा नहीं दे रहे हैं।’’
बब्बर ने कहा, ‘‘लोगों को दिन में दो वक्त पूरा भोजन मिलना चाहिए। वे कैसे हासिल कर सकते हैं, यह एक बहुत अच्छा सवाल है जिसे आपने पूछा है। आज भी मुंबई शहर में मैं 12 रुपए में एक पूरा भोजन पा सकता हूं। नहीं नहीं, बड़ा पाव नहीं। ढेर सारा चावल, दाल, सांभर और कुछ सब्जियां भी मिली हैं।’’ बब्बर ने इसके साथ ही कहा कि वह यह नहीं कह रहे हैं कि यह अच्छा है।
एनडीटीवी पर इस टिप्पणी का मजाक उड़ाते हुए भाजपा की एक टेलीविजन पैनलिस्ट ललिता के. मंगलम ने कहा कि कांग्रेस प्रवक्ता की यह बात हंसने लायक है। सब्जियों खास कर टमाटर की बढ़ती कीमतों के बारे में एक सवाल पर बब्बर ने कहा, ‘‘अगर आप टमाटर से गरीबी का आकलन करेंगे तो यह मुश्किल होगा। शहरों में आप टमाटर नहीं खाएं, लेकिन गांवों में गरीब लोग टमाटर तोड़ते हैं और खाते हैं। मुझे बताएं कि क्या वह अमीर हैं या गरीब। बहरहाल, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह ‘‘गरीबी की परिभाषा नहीं दे रहे हैं।’’
Wednesday, 24 July 2013
ओबामा को भेजे मोदी विरोधी खत में सांसदों के फर्जी दस्तखत?
वॉशिंगटन/नई दिल्ली।। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अमेरिकी वीजा की वकालत कर रहे बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह की कोशिशों को झटका लग सकता है। राजनाथ सिंह अभी अमेरिका में हैं और वह ओबामा प्रशासन से नरेंद्र मोदी को वीजा देने की बार-बार अपील कर रहे हैं। राजनाथ की इन कोशिशों के बीच संसद के 65 सदस्यों ने प्रेजिडेंट बराक ओबामा को चिट्ठी लिखकर अमेरिकी प्रशासन से अपील की है कि वह मोदी को वीजा नहीं देने की मौजूदा नीति को बनाए रखे। हालांकि, सांसदों की चिट्ठी पर विवाद खड़ा हो गया है। चिट्ठी में सीपीएम नेता सीताराम येचुरी और सीपीआई के एम. पी. अच्युतन के नाम शामिल हैं, जबकि दोनों ने इसे फर्जी बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने इस तरह की किसी चिट्ठी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
12 राजनीतिक दलों से ताल्लुक रखने वाले सांसदों की ओर से ओबामा को लिखे पत्र में कहा गया है कि हम सम्मानपूर्वक आपसे अपील करते हैं कि मोदी को अमेरिकी वीजा नहीं देने की मौजूदा नीति को बनाए रखा जाए। ऐसे ही एक पत्र पर राज्यसभा के 25 सदस्यों तथा एक अन्य पत्र पर लोकसभा के 40 सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। ये पत्र 26 नवंबर और 5 दिसंबर 2012 को लिखे गए थे, जिन्हें रविवार को वाइट हाउस को फिर से फैक्स किया गया है।
राजनाथ सिंह के अमेरिकी सांसदों, थिंक टैंक और अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात के लिए वॉशिंगटन पहुंचने के साथ ही इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल द्वारा पत्रों की प्रतियां उपलब्ध कराई गईं। राजनाथ यहां अमेरिकियों से मोदी के लिए वीजा पर लगे बैन को हटवाने की अपील करने वाले हैं।
इस अभियान की कमान संभालने वाले राज्यसभा के निर्दलीय सांसद मोहम्मद अदीब ने कहा कि मोदी को वीजा देने से रोकने के लिए ये कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन पत्रों को पहली बार सार्वजनिक किया गया है।
राजनाथ सिंह ने रविवार को न्यू यॉर्क में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि वह अमेरिकी सांसदों से अपील करेंगे कि वे 2002 के दंगों के बाद मोदी पर लगाए गए वीजा बैन को हटवाने के लिए अमेरिकी प्रशासन पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करें। गौरतलब है कि गुजरात में मोदी के मुख्यमंत्री रहने के दौरान मानवाधिकारों के हनन के आधार पर वीजा पर बैन लगाया गया था।
इन चिट्ठियों पर हस्ताक्षर करने वालों में सीपीएम नेता सीताराम येचुरी और सीपीआई सांसद एम. पी. अच्युतन का भी नाम है। दोनों राज्यसभा के सदस्य हैं। संपर्क करने पर येचुरी ने हैरानी जाहिर करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसे किसी पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। उन्होंने कहा कि यह कट पेस्ट का मामला लगता है।
येचुरी ने कहा कि मैं अमेरिकी प्रशासन को पत्र लिखने वाला और इस प्रकार का कदम उठाने वाला अंतिम व्यक्ति होऊंगा। हम नहीं चाहते कि कोई देश के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करे। ये ऐसे मसले हैं जिनका समाधान भारतीय राजनीति के तहत किया जाना चाहिए। अच्युतन ने भी ऐसा कोई पत्र लिखे जाने से इनकार किया।
हालांकि, अदीब ने जोर देकर कहा कि येचुरी और अच्युतन ने पत्र पर हस्ताक्षर किए थे और उन्हें हैरानी है कि वे अब पीछे हट रहे हैं। ओबामा को लिखे पत्र में कहा गया है कि मोदी प्रशासन के कई सीनियर अधिकारियों समेत अपराधियों के खिलाफ कानूनी मामले अभी भी लंबित हैं और इस समय बैन को हटाने से इसे 2002 के नरसंहार में मोदी की भूमिका से जुड़े मुद्दों को खारिज किए जाने के रूप में देखा जाएगा।
Tuesday, 23 July 2013
शिवराज ने नहीं माना मोदी को नेता! पोस्टर और भाषण में गुजरात के सीएम नदारद
कांग्रेस ने जहां राहुल गांधी को 'पीएम कैंडिडेट' बताया है, वहीं भाजपा ने
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनावी फेस बनाने व उन्हें फ्रीहैंड
देने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ा दिया है। वहीं, मध्य प्रदेश के सीएम
शिवराज सिंह चौहान की जनआशीर्वाद यात्रा के प्रचार होर्डिंग्स से बीजेपी
के राष्ट्रीय चुनाव प्रचार प्रमुख नरेंद्र मोदी का चेहरा गायब है। जद यू के
अलग होने के बाद अब बीजेपी का पूरा फोकस अकेले दम पर अपनी ताकत बढ़ाने पर
है। सहयोगियों की चिंता पार्टी चुनाव बाद करेगी।अमेरिका में भाजपा अध्यक्ष
राजनाथ सिंह के ‘प्रो मोदी’ बयान को सोची समझी रणनीतिक कवायद का हिस्सा
माना जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को भी पार्टी मोदी
के नाम पर काफी हद तक राजी कर चुकी है। लिहाजा पूरा एक्शन प्लान इस तरह से
बन रहा है कि चुनावी संघर्ष भाजपा बनाम कांग्रेस का हो जाए। पार्टी का पूरा
प्लान मोदी की लोकप्रियता के सहारे हिंदुत्ववादी एजेंडा व डेवलपमेंट
थ्योरी को एक साथ परवान चढ़ाना है।
पीएम उम्मीदवार घोषित करने का दबाव : मोदी को चुनाव अभियान की कमान दी जा चुकी है, वरिष्ठ नेता मोदी की अगुवाई वाली चुनाव टीम में काम करने को राजी हो गए हैं। अब पार्टी के भीतर यह दबाव बन रहा है कि मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया जाए।
पार्टी में आडवाणी खेमे के नजदीकी नेता मान रहे हैं कि मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार घोषित करने पर कांग्रेस तथा यूपीए के खिलाफ चुनावी मुद्दा भटक कर सीधे ध्रुवीकरण पर केंद्रित हो सकता है।
मोदी पर बड़ा दांव तय
यह भी कयास लगाई जा रही है कि मोदी के लिए बहुमत का जुमला, दरअसल उन्हें दिया गया चुनावी टास्क है। इसे पूरा करने पर वे प्रधानमंत्री पद के दावेदार होंगे। यानी पार्टी को बहुमत के करीब लाने की जिम्मेदारी मोदी के कंधों पर होगी।
बहुमत की स्ट्रैटजी
पार्टी की रणनीति है कि वह कम से कम 300 सीटों पर मजबूती से लड़े। बहुमत के लिए 272 का जादुई आंकड़ा चाहिए। उत्तरप्रदेश, बिहार, राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, उत्तराखंड पर पार्टी का खास फोकस है। पार्टी को लग रहा है कि उसे करीब 200 सीटें भी अकेले दम पर मिलती हैं तो सहयोगियों के लिए कवायद में ज्यादा दिक्कत नहीं होगी।
चुनौती कम नहीं-
पार्टी के भीतर ही मोदी कुछ नेताओं का तर्क है कि मोदी के नाम पर सहयोगी मिलने की संभावना बहुत कम। ऐसे में जरूरत पडऩे पर दूसरे चेहरा आगे करने का विकल्प खुला रहना चाहिए। संसदीय बोर्ड इस पर भी मंथन करेगा।
राजनाथ सिंह ने साफ कहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले और बाद में कुछ दल एनडीए में आएंगे। इन्हें लाएगा कौन? कोई उत्तर नहीं। मतलब एनडीए का कुनबा बढ़ाने की जिम्मेदारी भी मोदी पर। चुनाव से पहले और बाद में भी।
बिहार में लिटमस टेस्ट
मोदी के लिए भाजपा ने जदयू से नाता तोड़ लिया। बिहार में सत्ता से बाहर आ गई। चुनौती बिहार में सीट बढ़ाने की नरेंद्र मोदी के जिम्मे।
मोदी के चिंतन में चिंता भी साथ
राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि वह चुनावी मुद्दे को सांप्रदायिकता की तरफ ले जाना चाहती है। परोक्ष रूप से भाजपा ने मोदी को सचेत किया है कि चुनाव में ध्रुवीकरण की तरफ बढऩे से भाजपा को लाभ हो न हो, कांग्रेस को नुकसान कम होगा।
पीएम उम्मीदवार घोषित करने का दबाव : मोदी को चुनाव अभियान की कमान दी जा चुकी है, वरिष्ठ नेता मोदी की अगुवाई वाली चुनाव टीम में काम करने को राजी हो गए हैं। अब पार्टी के भीतर यह दबाव बन रहा है कि मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया जाए।
पार्टी में आडवाणी खेमे के नजदीकी नेता मान रहे हैं कि मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार घोषित करने पर कांग्रेस तथा यूपीए के खिलाफ चुनावी मुद्दा भटक कर सीधे ध्रुवीकरण पर केंद्रित हो सकता है।
मोदी पर बड़ा दांव तय
यह भी कयास लगाई जा रही है कि मोदी के लिए बहुमत का जुमला, दरअसल उन्हें दिया गया चुनावी टास्क है। इसे पूरा करने पर वे प्रधानमंत्री पद के दावेदार होंगे। यानी पार्टी को बहुमत के करीब लाने की जिम्मेदारी मोदी के कंधों पर होगी।
बहुमत की स्ट्रैटजी
पार्टी की रणनीति है कि वह कम से कम 300 सीटों पर मजबूती से लड़े। बहुमत के लिए 272 का जादुई आंकड़ा चाहिए। उत्तरप्रदेश, बिहार, राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, उत्तराखंड पर पार्टी का खास फोकस है। पार्टी को लग रहा है कि उसे करीब 200 सीटें भी अकेले दम पर मिलती हैं तो सहयोगियों के लिए कवायद में ज्यादा दिक्कत नहीं होगी।
चुनौती कम नहीं-
पार्टी के भीतर ही मोदी कुछ नेताओं का तर्क है कि मोदी के नाम पर सहयोगी मिलने की संभावना बहुत कम। ऐसे में जरूरत पडऩे पर दूसरे चेहरा आगे करने का विकल्प खुला रहना चाहिए। संसदीय बोर्ड इस पर भी मंथन करेगा।
राजनाथ सिंह ने साफ कहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले और बाद में कुछ दल एनडीए में आएंगे। इन्हें लाएगा कौन? कोई उत्तर नहीं। मतलब एनडीए का कुनबा बढ़ाने की जिम्मेदारी भी मोदी पर। चुनाव से पहले और बाद में भी।
बिहार में लिटमस टेस्ट
मोदी के लिए भाजपा ने जदयू से नाता तोड़ लिया। बिहार में सत्ता से बाहर आ गई। चुनौती बिहार में सीट बढ़ाने की नरेंद्र मोदी के जिम्मे।
मोदी के चिंतन में चिंता भी साथ
राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि वह चुनावी मुद्दे को सांप्रदायिकता की तरफ ले जाना चाहती है। परोक्ष रूप से भाजपा ने मोदी को सचेत किया है कि चुनाव में ध्रुवीकरण की तरफ बढऩे से भाजपा को लाभ हो न हो, कांग्रेस को नुकसान कम होगा।
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